नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन) भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने वाला एक ऐतिहासिक कानून है। 2023 में पारित यह अधिनियम लोकसभा और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाकर नीति-निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करता है, जो 15 वर्षों के लिए प्रभावी होगा।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन) भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने वाला एक ऐतिहासिक कानून है। 2023 में पारित यह अधिनियम लोकसभा और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाकर नीति-निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करता है, जो 15 वर्षों के लिए प्रभावी होगा। 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम की मुख्य विशेषताएं:
33% आरक्षण: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित।
SC/ST कोटा: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण शामिल है।
संविधान संशोधन: यह 128वां संविधान संशोधन विधेयक था, जो पारित होने के बाद 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम बना।
लागू करने की प्रक्रिया: 
यह आरक्षण परिसीमन (Delimitation) और जनगणना के बाद लागू होगा, जिसके 2029 तक लागू होने की संभावना है।
कार्यकाल:
 यह प्रावधान 15 वर्षों के लिए मान्य होगा। 
यह कानून लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम - Drishti Judiciary
       कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा प्रस्तुत विधेयक का उद्देश्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली संसद और विधानसभाओं की सीटों में महिलाओं को 33% आरक्षण .

MJF Lion ER YK Sharma 

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